Home महिला जगत 8 वीं पास रूमा देवी ने बनाया 22,000 महिलाओं को आत्मनिर्भर

8 वीं पास रूमा देवी ने बनाया 22,000 महिलाओं को आत्मनिर्भर

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साल था 2008 । बाड़मेर नामक जिले में दूर-दूर तक फैला रेगिस्तान , जहां आमतौर पर लड़कियों को घरों में ही रखा जाता था , वँहा एक क्रांति की नींव रखी जा रही थी ।राजस्थान के इस सरहदी जिले में एक युवा महिला ,जिसका विवाह महज 17 वर्ष की उम्र में हो गया था, वह आपनी जिजीविषा से परिस्थितियों से जूझ रही थी । वह बैग और कुशन कवर बनाती थीं लेकिन आय बहुत कम हो रही थी।

गरीबी और विषम परिस्थितियों से मुकाबला करते हुए उन्होंने कुछ अलग करने का निश्चय किया। अपने गांव की निरक्षर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिये इस युवा महिला ने शुरू में दस महिलाओं का एक स्वयं सहायता समूह बनाया और हर महिला से सौ रुपये लिए। इस पैसे से जरूरी सामान लेकर उन्होंने परिधान बनाने का निश्चय किया। यह परिधान जब अच्छी कीमत में बिका तो महिलाओं की हिम्मत बढ़ गई।

इसके बाद इन महिलाओं ने युवा महिला के नेतृत्व में ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान नामक NGO की सदस्यता ली। अपनी मेहनत के बलबूते महज दो साल बाद ही यह युवती इस संस्थान की अध्यक्ष बन गयी। आज इस युवती के नेतृत्व में इस समूह की प्रत्येक सदस्य हर महीने 3,000 से 10,000 रुपये कमा रही है।

उनका एनजीओ महिलाओं को प्रशिक्षण और विपणनन के गुर भी सिखाता है। आज यह हालत है कि वह बाड़मेर के मंगला की बेड़ी गांव सहित तीन जिलों के 75 गांव में 22000 महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुकी हैं।

रूमा देवी पर कार्यक्रम देखें

जानते है यह युवा महिला कौन है ? यह है रूमा देवी। कल अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके रुमा देवी को राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद द्वारा राष्ट्रपति भवन में भारत में महिलाओं के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “नारी शक्ति पुरस्कार” प्रदान कर सम्मानित किया गया | यह सम्मान उस संघर्ष का सम्मान है जो रूमा देवी ने प्रतिकूल परिस्थितियों में किया। साथ ही यह सम्मान है संस्थान के सचिव Vikram Singh Barmer विक्रम जी का जिन्होंने पार्श्व में रहकर इस संघर्ष में रूमा देवी का हर कदम पर साथ दिया ।

बताया जाता है कि कुशन और बैग बनाने के कार्य मे ज्यादा मुनाफा न होने के कारण रूमा देवी और विक्रम जी ने सूती (काटॅन के) दुपट्टे और कुर्ते बनाना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने सिल्क का रूख किया और टसर, मूंगा मटका सिल्क में साड़ी बनाना शुरू किया। सिल्क की साड़ियों को लोगों ने हाथोंहाथ लिया और आज बॉलीवुड के कलाकारों सहित जाने माने लोग इनकी पारंपरिक डिजाइन वाली सिल्क साड़ियों को बहुत चाव से खरीदते हैं।हाल ही में बाडमेर रिफाइनरी के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रूमा देवी द्वारा डिजाइन किया गया एक शाल भेंट किया गया था। जिसे प्रधानमंत्री ने बहुत सराहा।

बताया जाता है कि उन्होंने भारत की विख्यात डिजाइनर अनिता डोंगरे, बी वी रसैल और अब्राहम ठाकुर के साथ काम किया है। उनकी बनाई साड़ियों को प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी बहुत पसंद किया। उनके उत्पादों को लंदन फैशन वीक और कोलंबो फैशन वीक में भी प्रदर्शित किया गया है।

महज आठवीं(8) कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त रूमा देवी की यह कहानी सभी के लिए प्रेरणादायक है । मेरे अग्रज Ayodhya Prasad Gaur भाईसाहब का दिल की गहराइयों से आभार जिन्होंने रूमा जी और विक्रम जी जैसी शख्सियतों से परिचय कराया।

रूमा देवी जी , विक्रम जी सहित उनकी पूरी टीम को हार्दिक बधाई । शुभकामनाएं।

सादर

सुधांशु

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