Home पुणे पुणे के 9 वर्षीय बालक अद्वैत ने फतह किया माउंट किलीमंजारो

पुणे के 9 वर्षीय बालक अद्वैत ने फतह किया माउंट किलीमंजारो

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पुणे (तेज समाचार डेस्क). महज 6 साल की नन्हीं उम्र में एवरेस्ट बेस कैंप के शिखर पर चढ़ कर सबसे युवा भारतीय बनने वाले अद्वैत भारतिया ने अब 9 साल की छोटी उम्र में माउंट किलीमंजारो फतह करके अपने पहले से जगमगाते मुकुट में चार चांद लगा दिए हैं। अद्वैत ने अपनी मां पायल भरतिया और चढ़ाई अभियान के नेता समीर पाथम के साथ मैकेम रूट से अपनी ट्रेकिंग प्रारंभ की थी और 31 जुलाई 2019 को 18,652 फीट की विकट ऊंचाई पर स्थित माउंट किलीमंजारो के शीर्ष पर पहुंच गए।

विरल हवा, समुद्र सतह के मुकाबले लगभग 50% तक घटी हुई वायुमंडल की ऑक्सीजन और अक्सर लगभग  21 से मायनस 25 डिग्री सेल्सियश तक गिरा हुआ शून्य से नीचे का तापमान कुछ ऐसी कठिनाइयां हैं, जिसे पर्वतारोहियों को झेलना पड़ता है। इनका मुकाबला करने के लिए अद्वैत को 2 महीने से ज्यादा समय तक कड़ी ट्रेनिंग से गुजरना पड़ा। उनकी दिनचर्या में एक घंटा तैराकी करना, दूसरे घंटे में फुटबाल, क्रिकेट और टेनिस खेलने जैसी कार्डियोवैस्कुलर ट्रेनिंग करनातथा तीसरे घंटे के दौरान100 मंजिल की सीढ़ियां चढ़नाऔर पार्कूर का अभ्यास करना उनकी ट्रेनिंग का अनिवार्य हिस्सा था। माउंट किलीमंजारो की तैयारी के सिलसिले में अद्वैत ने अपनी मां के साथ लेह, लद्दाख और पुणे के आसपास भी ट्रेकिंग की थी।

“यह ट्रेकिंग वास्तव में मुश्किल थी लेकिन साथ ही साथ मजेदार भी थी। जब मैं एवरेस्ट बेस कैंप को समिट कर रहा था तब हम लकड़ी के बने मकानों में रह रहे थे, लेकिन किलीमंजारो की ट्रेकिंग के दौरान हम टेंटों में रुके, जिससे बर्फ और आसपास के वातावरण से परिचित होने का बेहतर मौका मिला। मैं ट्रेकिंग और भी जल्दी पूरी कर सकता था, लेकिन पहाड़ इतने सुंदर थे कि उस सुंदरता को जज्ब करने के लिए मैंने बहुत सारे ब्रेक लिए। मैं अगले साल माउंट एल्ब्रुस की योजना बना रहा हूं, लेकिन फिलहाल यह मेरे लिए स्कूल लौटने का समय है और मैं उत्साहित हूं।”- अद्वैत भारतिया ने बताया।

ट्रेकिंग के दौरानपर्वतारोहियों ने उन्हें ‘सिम्बम टोटो’ अर्थात ‘लिटिल सिम्बा’ का नाम दे रखा था। अपनी इस यात्रा के दौरान वे अब तक के सबसे कम उम्र के ट्रेकर थे और रास्ते में वे अक्सर साथी ट्रेकर्स का ध्यान इस तरह आकर्षित करते थे कि वे लोग अपने साथ उनकी एक तस्वीर लिए बिना नहीं मानते थे। साथी ट्रेकर्स को लगता था कि घर लौटने पर वह तस्वीर उनके बेटे या पोते के लिए प्रेरणा बनेगी। अद्वैत को चढ़ाई के दौरान उन साथी पर्वतारोहियों से बहुत सारे फिस्टबम्प्स और हाई फाइव्स मिले,जो इस स्तर की चढ़ाई में शामिल इतने छोटे-से लड़के को देख करबेहद प्रभावित थे।

“उस ऊंचाई के साथ एडजस्ट करने में परेशानी होने के चलते मेरी यात्रा माउंट किलीमंजारो के शिखर से 1000 फीट पहले ही समाप्त हो गई थी। हालांकिसमीर तथा अपने तंजानियाई गाइड के साथ अद्वैत ने ट्रेकिंग जारी रखी। मुझे अद्वैत और इस ट्रेकिंग को पूरा करने के प्रति उनके समर्पण पर बहुत गर्व है। समापन वाले दिन अद्वैत काफी भावुक हो गए थे और सभी प्रयासों में पूरा जोर लगा देने के लिए उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अपने पोर्टर्स, टेंट पिचर्स और कैटरिंग टीम को धन्यवाद दिया।”- बताती हैं अद्वैत की मां पायल भारतिया।

एक्सपेडिशन लीडर और एडवेंचर पल्स के सह-संस्थापकसमीर पाथम का कहना है, “अद्वैत इस बात के उत्कृष्ट उदाहरण हैं कि अगर सही दिशा, कड़ी मेहनत, दृढ़ निश्चय और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित हो तो मनुष्य बहुत कम उम्र में ही कैसे-कैसे कारनामों को अंजाम दे सकता है। लड़के ने जबरदस्त दृढ़ता और अतुल्य परिपक्वता दिखाई। इस तरह वह चढ़ाई अभियान के विभिन्न कष्टों को झेलने में सक्षम हो सके। इस ट्रेकिंग को सफल ढंग से पूर्ण करकेअद्वैत 6 साल की उम्र में माउंट एवरेस्ट बेस कैंप तथा 9 साल की उम्र में माउंट किलीमंजारो फतह करने वाले भारत के सबसे कम उम्र के पर्वतारोही बन गए हैं।”

9 साल की अपनी इस नन्हीं-सी उम्र मेंअद्वैत ने खुद को एक अद्भुत बालक साबित कर दिया है। ईस्टर की छुट्टियों में उन्होंने स्विट्जरलैंड से इटली तक की स्कीइंग करके दिखा दिया था कि वे एक उत्साही स्की खिलाड़ी है। वह एक उस्ताद सर्फर भी हैं। अद्वैत को पियानो, वायलिन, गिटार और ड्रम जैसे वाद्ययंत्र बजाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय मंदारिन भाषा का प्रमाणन हासिल करने वाले वह सबसे कम उम्र के भारतीय हैं।

इस ट्रेकिंग का आयोजन पुणे स्थित एडवेंचर एवं ट्रेकिंग कंपनी एडवेंचर पल्स ने किया था। अद्वैत के ट्रेनर समीर पाथम ने एवरेस्ट बेस कैंप के दौरान पूरे 12 दिनों तक उनका मार्गदर्शन किया था और इस बार माउंट किलीमंजारो के दौरान पूरे 7 दिन उन्होंने साथ-साथ पसीना बहाया। इसके साथ-साथ पाथम ने अद्वैत को पर्वतारोहण की कहानियों, माउंट एवरेस्ट की किंवदंतियों, येती के ग्रेट हिमालयन मिथ और रुडयार्ड किपलिंग तथा रस्किन बॉन्ड की लिखी कहानियां सुनाकर प्रेरित करना जारी रखा।

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