Home पुणे ‘कर्मण्ये वाधिकारस्ते’ को सुषमा जी ने अपने जीवन में दिखाया : मोदी

‘कर्मण्ये वाधिकारस्ते’ को सुषमा जी ने अपने जीवन में दिखाया : मोदी

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नई दिल्ली (तेज समाचार डेस्क). सुषमा स्वराज एक विलक्षण नेता थी. उन्होंने विदेश मंत्री की छवि को भारतीय परिवेश में ढाल कर ‘कर्मण्ये वाधिकारस्ते’ क्या होता है, यह सुषमाजी ने जीवन में दिखाया. उनके व्यक्तित्व के अनेक पहलू थे. जीवन के अनेक पड़ाव थे.

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को मंगलवार को श्रद्धांजलि दी गई. इस सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धांजलि देते हुए उक्त प्रतिपादन किया. इस सभा में गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा सभी राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता मौजूद थे.

– सुषमा जी सभी के लिए एक प्रेरणा थी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में एक अनन्य निकट साथी के रूप में उनके साथ काम करते-करते अनगिनत अनुभवों और घटनाओं के हम साक्षी हैं. व्यवस्था और अनुशासन के तहत जो भी काम मिले उसे जी-जान से करना और व्यक्तिगत जीवन में बहुत बड़ी ऊंचाई प्राप्त करने के बाद भी करना कार्यकर्ताओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है.

– वे विचारों की पक्की थीं
मोदी ने कहा कि इस बार जब सुषमाजी ने लोकसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किया, वैसा ही फैसला उन्होंने पहले भी किया था. वे अपने विचारों में बड़ी पक्की रहती थीं. मैंने और वेंकैयाजी ने उनसे मुलाकात की तो उन्होंने मना किया. हमने उनसे कर्नाटक की विपरीत परिस्थितियों में चुनाव लड़ने का आग्रह किया था. उन्होंने परिणाम जानते हुए भी ऐसा किया. इस बार हमने उन्हें बहुत समझाया, लेकिन इस बार उन्होंने सार्वजनिक घोषणा कर दी.

– उनके सभी भाषण प्रेरक भी थे
सार्वजनिक जीवन में उन्होंने मिसाल पेश की. उनका भाषण प्रभावी होता था, केवल इतना ही नहीं है. उनका भाषण प्रेरक भी होता था. उनके व्यक्तित्व में विचारों की गहराई का अनुभव हो कोई करता था. अभिव्यक्ति की ऊंचाई हर पल नए मानक पार करती थी. दोनों में से एक होना तो स्वाभाविक है, लेकिन दोनों होना बहुत बड़ी साधना के बाद होता है. कृष्ण भक्ति को वे समर्पित थीं. उनके मनमंदिर में कृष्ण बसे रहते थे.

– सुषमा जी का अनुच्छेद 370 के मुद्दे से जुड़ाव था
मोदी ने कहा कि वे मुझे जय श्रीकृष्ण कहती थीं और मैं उन्हें जय द्वारकाधीश कहता था. कर्मण्ये वाधिकारस्ते क्या होता है, यह सुषमाजी ने अपने जीवन में दिखाया था. उन्होंने सैकड़ों घंटों तक अलग-अलग फोरम में अनुच्छेद 370 और कश्मीर पर बोला होगा. उनका इस मुद्दे से बहुत जुड़ाव था. सुषमा जी के जाने के बाद मैं बांसुरी से मिला. उन्होंने बताया कि सुषमा जी इतनी खुशी के साथ गई हैं, इसकी कल्पना ही की जा सकती है. उनका मन नाच रहा था.

– बांसुरी स्वराज ने व्यक्त किया आभार
सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज ने कहा, कि आज आप सब यहां दल और विचारधारा से ऊपर उठकर पधारे. इसके लिए मैं आभार प्रकट करती हूं. उन्होंने कई मुसीबतों का सामना किया. दुश्मनों को मित्र में तब्दील किया. वे काफी सरल और सुलझी हुई थी. मेरी वह अच्छी दोस्त थीं. उनकी 42 वर्ष की राजनीतिक तपस्या में आप सबने अपना योगदान दिया था. इसके लिए शुक्रिया.

– प्रधानमंत्री को भी दिया धन्यवाद
बांसुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी, आपने व्यक्तिगत रूप से उनका साथ दिया. इसके लिए मैं शुक्रगुजार हूं. आप सभी जनता का शुक्रगुजार हूं. यहां उपस्थित लोगों ने जो मुझे खुशी दी. उसकी शुक्रगुजार हूं. आप सभी यहां आए और हमारे परिवार का गम बांटा. इसके लिए धन्यवाद. अनुराधा पौडवाल जी और उनकी टीम का भी धन्यवाद. उन सभी का दिल से आभार, जिन्होंने हमें इस गम की घड़ी में ढांढस बंधाया.