Home विविधा चक्रव्यूह: इन्हें हो जाए ‘कोरोना’ तभी बंद होगा रोना!

चक्रव्यूह: इन्हें हो जाए ‘कोरोना’ तभी बंद होगा रोना!

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 होली का त्यौहार है. सब मस्ती के मूड में है. लेकिन दुनिया भर में इन दिनों चीन के नए प्रोडक्ट ‘कोरोना’ वायरस की दहशत है. चीन में ही अब तक इसके कारण चार हजार से ज्यादा लोग मर चुके हैं. भारत में भी इसके संक्रमित मरीज मिले हैं. किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक दिन मौत भी ‘मेड-इन-चायना’ आएगी! फिर भी हमें घबराने की जरूरत नहीं है. क्योंकि यह जानलेवा वायरस 27 डिग्री तापमान के बाद स्वयं मर जाता है. …और अपने क्षेत्र में तो अब गर्मी का कहर होने वाला है. अतः हमको-आपको, किसी को भी डरने या घबराने की कोई जरूरत नहीं है. वैसे दुनिया भर में तहलका मचा देने वाले इस ‘कोरोना’ वायरस की चपेट में अब 80 से ज्यादा देश आ चुके हैं, मगर हर देश में इससे बचने के उपाय भी किए जा रहे हैं.
      कहते हैं कि जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वक्त आने पर वह खुद इस गड्ढे में गिर जाता है, धंस जाता है. ऐसा ही चीन के साथ हो रहा है. चौंकाने वाली खबर यह है कि इस महाविनाशी ‘कोरोना वायरस’ को चीन के ही कुछ खुराफाती वैज्ञानिकों ने बनाया था. जो वहां की एक लैब (प्रयोगशाला) से धोखे से लीक हो गया. इसलिए इसने सबसे पहले चीन में ही तांडव किया और भारी तबाही मचायी. चीन के वुहान शहर के बाहर आरडीएनए नामक लैब (प्रयोगशाला) में इसे दुश्मनों पर ‘जैविक हथियार’ के रूप में तैयार किया गया था. …तो क्या दुश्मन देशों को निपटाने (यानि वहां महामारी फैलाने) के उद्देश्य से बनाए गए इस खतरनाक ‘बायोलॉजिकल वेपन्स’ के स्वनिर्मित गड्ढे में खुद चीन ही धंस-फंस गया? दुनिया भर के देश अब इसी की जांच पड़ताल कर रहे हैं.
    अगले कुछ दिन हम भारतीय लोग, रंगपंचमी के माहौल में रंगे रहेंगे. लेकिन इस बार ज्यादा सतर्कता बरतनी जरूरी है. होली में इस्तेमाल की जाने वाली ज्यादातर चीजें चीन में ही बनती हैं. जैसे रंग, पिचकारी, मास्क, टोपियां इत्यादि. ये वस्तुएं प्लास्टिक और पॉलीमर से बनती हैं. इसलिए चीन का सस्ता माल खरीदना और उनका इस्तेमाल करना अभी से बंद कर दीजिए. वैसे चीन से आयातित होली की सामग्री नवंबर-दिसंबर तक भारत आ चुकी है. फिर भी सावधानी बरतने में क्या हर्ज है? दूसरी ओर विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना से बचने के लिए अपने खान-पान में अदरक, लहसुन और हल्दी की मात्रा बढ़ा लें. संतरा-अंगूर जैसे रसदार फल ज्यादा खाएं. हर समय हाथ सेनेटाइजर से ही धोएं. जेब में नीलगिरी का तेल लगा रूमाल रखें और बीच-बीच में उसे सूंघते जाएं. क्योंकि सुरक्षा और सतर्कता ही अपने जीवन का बचाव है.
     बहुत दिनों से दिमाग में एक बात गूंज रही है. जैसे कि हमारे यहां दंगों में कभी कोई नेता नहीं मरता, वैसे ही ‘कोरोना’ वायरस से भी नहीं मरेगा! मरना तो आम जनता का ही होता है… चाहे वह महंगाई की मार से मरे, कर्ज के बोझ से मरे, दंगों से मरे या बेरोजगारी से! मैं तो कहता हूं कि हमारे यहां के उन सभी नेताओं के शरीर में ‘कोरोना’ वायरस घुस जाए, जो भ्रष्टाचारी हैं, जो अत्याचारी हैं! जो भाईचारे और सद्-भाव से रह रही दो कौमों को आपस में लड़ा कर अपना स्वार्थ सिद्ध करते हैं. जब तक इन्हें नहीं होगा ‘कोरोना’, …तब तक हमारा बंद नहीं होगा रोना!
     उधर, हमारे टॉप क्लास नेताओं में कोरोना की इतनी दहशत है कि उन्होंने इस साल होली नहीं मनाने का फैसला किया है. अक्सर विदेश जाने वाले कुछ ने तो अपनी विदेश-यात्रा भी रद्द कर दी है. मरने का इतना खौफ? अब इनका देशहित कहां गया ‘भाइयों-बहनों?’ संसद या विधानसभा में देशहित या राज्यहित के नाम पर स्वार्थ के लिए लड़ने वालों को अगर ‘कोरोना’ लग जाए, तभी राष्ट्र-राज्य चैन की सांस लेगा. लेकिन कोरोना के ‘वायरस’ भी संसद में चलते हंगामे के कारण हताश-निराश हैं. उन्हें संसद में बैठे नेताओं में व्याप्त स्वार्थ और कमीनेपन के ‘वायरस’ से ही खुद मर जाने का डर सता रहा है! इनके साथ ही बलात्कारी बाबाओं, भ्रष्ट नौकरशाहों, गैंगस्टर्स, अंडरवर्ल्ड डॉनों, माफिया गिरोहों, फर्जी साहूकारों आदि को भी ‘कोरोना’ ने लील जाना चाहिए! तभी होगा देश का भला. वैसे आप सभी स्वस्थ रहें, मस्त रहें. ‘कोरोना’ वायरस कभी आपको छू भी ना पाए. होली मनाएं. हमारी हार्दिक शुभकामनाएं.