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चक्रव्यूह – प्रधानमंत्री हटाओ प्रतियोगिता…!

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चक्रव्यूह – प्रधानमंत्री हटाओ प्रतियोगिता…!

संक्रांति के अवसर पर देश के कई राज्यों में पतंग प्रतियोगिताएं होती हैं. दक्षिणी राज्यों में इसे ‘पोंगल’ के रूप में मनाते हैं, जहां बैलों पर काबू पाने की स्पर्धा ‘जलीकट्टू’ नाम से होती है. वहीं अक्सर सर्दी के महीनों में देशभर के स्कूल-कॉलेजों में विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं. ऐसे में हमारे राजनेता भला क्यों पीछे रहते? उन्होंने भी अब चुनाव से पहले ही ‘प्रधानमंत्री हटाओ प्रतियोगिता’ शुरू कर दी है. मजा यह कि इसमें सारे के सारे धुरंधर खिलाड़ी भाग ले रहे हैं, जो खुद ही प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं. इसलिए पहले एकजुट होकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ये लोग हटाना चाहते हैं. फिर एक-एक कर आपस में ये लोग एक-दूसरे की टांगें खींचेंगे, कपड़े फाड़ेंगे …और खुद को प्रधानमंत्री बनवाने की होड़ में शामिल हो जाएंगे. इसमें जो जीतेगा वह कहलायेगा ‘सिकंदर’ …और जो हारेगा, वह बनेगा बंदर!

इस प्रतियोगिता के पहले चरण में ‘जगत बहनजी’ मायावती (बसपा) ने अखिलेश यादव (सपा) से उत्तरप्रदेश में गठबंधन कर लिया, लेकिन राहुल गांधी (कांग्रेस) को घास भी नहीं डाली. क्योंकि मायावती को लगता है कि वही ‘भावी प्रधानमंत्री’ हैं. उनके ‘हाथी के साथी’ अखिलेश यादव भी कहते हैं कि प्रधानमंत्री तो उत्तरप्रदेश से ही होगा. यह कहते हुए उन्होंने मायावती का नाम तक नहीं लिया. क्योंकि वे जानते हैं कि इसी उत्तरप्रदेश से मुलायम सिंह यादव (सपा), नरेंद्र मोदी (भाजपा) और राहुल गांधी (कांग्रेस) भी लोकसभा में चुने जाएंगे. …तो अखिलेश के मुंह में घी शक्कर कि उन्होंने यूपी से प्रधानमंत्री बनवाने का ऑप्शन (विकल्प) अभी खुला छोड़ रखा है. यानि यह ‘प्रधानमंत्री हटाओ प्रतियोगिता’ आम चुनाव के बाद ‘मुझे ही प्रधानमंत्री बनाओ स्पर्धा’ का रूप ले लेगी. तब देश भाड़ में जाए, इन्हें इसकी कोई चिंता नहीं होगी.

अब और मजा देखिए कि तथाकथित ‘भावी प्रधानमंत्री’ मायावती, ‘बंगाली बाघिन’ ममता बनर्जी द्वारा आयोजित भावी प्रधानमंत्रियों के मेले में नहीं गयीं. क्योंकि इस मेले (रैली) के जरिए ममता ने खुद को ‘भावी पीएम’ के रूप में प्रोजेक्ट किया. जबकि मायावती किसी भी कीमत पर ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री के रूप में नहीं देखना चाहतीं. इस महारैली में ‘स्वयंभू भावी प्रधानमंत्री’ राहुल गांधी भी नहीं गए. क्योंकि जिस तरह मायावती, ममता को पीएम पद पर देख नहीं सकतीं, उसी तरह ममता भी मायावती और राहुल को अगला प्रधानमंत्री बनाने से रोकने के लिए अपना ‘वीटो पॉवर’ इस्तेमाल करेंगी. जैसे अखिलेश यादव ने कहा कि अगला पीएम यूपी से होगा, उसी तर्ज पर ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेता नारे लगा रहे हैं कि अगला पीएम पश्चिम बंगाल से होगा. मगर दिक्कत यह है कि यूपी वालों को बंगाल नहीं चलता और पूर्वोत्तर के नेताओं को दक्षिण-पश्चिम के नेता नहीं चलते. यानि किसी को ममता नहीं चलेंगी, तो किसी को माया और किसी को राहुल नहीं चलेंगे, तो किसी को चंद्रबाबू या केजरीवाल नहीं चलेंगे.

मगर राकांपा सुप्रीमो शरद पवार इस देश में एक ऐसी वरिष्ठ हस्ती हैं, जो सबको चल सकते हैं. माया को भी, अखिलेश को भी, ममता को भी …और वक्त आने पर राहुल गांधी (कांग्रेस) को भी. मगर यहां दिक्कत यह है कि पवार की पार्टी के पास सौदेबाजी करने लायक सांसद नहीं होंगे. इसलिए भावी पीएम का पेंच अभी फंसा हुआ है. इसलिए ये सारे ‘भावी प्रधानमंत्री’ अपनी एकजुटता का जंगी प्रदर्शन कर सबसे पहले ‘वर्तमान प्रधानमंत्री हटाओ प्रतियोगिता’ में भाग ले रहे हैं. मोदी की कुर्सी अगर खाली हुई, तो ये सारे के सारे नेता ‘चील-कौवों’ की तरह लोकतंत्र की लाश पर उसका मांस नोंचने-खाने झपट पड़ेंगे! संक्रांति के संक्रमण काल में अपना लोकतंत्र भले ही विभिन्न समस्याओं के जख्मों से संक्रमित और लहूलुहान हो गया है, लेकिन बड़ी बात यह है कि आज भी वह अपने पैरों पर खड़ा है. उसका सही उपचार कर उसे चुस्त-दुरुस्त करना ही देश की जनता का प्रथम कर्तव्य होना चाहिए. वरना लोकतंत्र की लाश बिछाने और उसका मांस-भक्षण करने के लिए तो ‘चील-कौवे’ सियासी आकाश में मंडरा ही रहे हैं!

(सुदर्शन चक्रधर संपर्क : 96899 26102)

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