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चिंचोली पिंप्री ग्रामीणो कि पुरस्कार वापसी

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जलगांव (नरेंद्र इंगले):कल तक आपने घरवापसी , मौब लिंचिग के खिलाफ़ सेलेब्स कि सरकारी सम्मान वापसी जैसे विषय चैनलो पर देखे और पढे होगे लेकिन किसी गैरसरकारी संस्था द्वारा जनता के सहयोग से चलायी गयी वाटर हार्वेस्टिंग जैसी संकल्पना के लिए प्रदान किए जाने वाले पुरस्कार कि वापसी का खेदजनक मामला शायद कहि सुना या पढा नहि होगा ! यह हुआ है महाराष्ट्र के जामनेर तहसिल मे यहा चिंचोली पिंप्री के ग्रामीणो ने लामबंद होकर सत्यमेव जयते वाटर कप का तहसिल स्तरीय पुरस्कार इस लिए संस्था को वापिस किया है क्यो कि राज्यस्तरीय पुरस्कार के लिए पात्र होने के बावजूद गांव का चयन नहि किया गया !

11 अगस्त पुणे स्थित सम्मान वितरण समारोह मे चिंचोली पिंप्री के फुटेज का किसी अन्य गांव के नामांकन मे इस्तेमाल किया गया ऐसा आरोप भी लोगो ने लगाया है ! चिंचोली ग्राम पंचायत ने जनरल बैठक मे तहसिल स्तरीय पुरस्कार वापसी का प्रस्ताव तक पारीत कर दिया है ! पानी फ़ाऊँडेशन संस्था जो कि पूर्ण रुप से गैरसरकारी NGO है उसके पुरस्कार वापसी के लिए पंचायत मे सरकारी प्रस्ताव पारीत किया गया !

दुसरी ओर सुबे के मुख्यमंत्री पानी फ़ाऊँडेशन के काम से इतने प्रसन्न रहे कि उन्होने इस मुहिम को जनआंदोलन बनाने कि बात कहि थी ! किसी गैरसरकारी संगठन कि पहल मे सहभागीता दर्ज कर अपने गांव के लिए अपने लिए राष्ट्रीय कर्तव्य के रुप मे योगदान देना यह हमारा दायित्व है इसी के साथ पुरस्कार नामांकन मे हुए अन्याय पर आवाज बुलंद करना हमारा अधिकार भी है लेकिन दायित्वो को अधिकारो से जोडने पर नतीजा हमेशा अलग होता है ! अलबत्ता सरकार वाटर हार्वेस्टिंग जैसे कामो मे अब तक कितनी सफ़ल रहि इसकि समीक्षा और सवाल सिधे जनता से उठना उसी तरह जरुरी है जिस तरह पानी फ़ाऊँडेशन को पक्षपात के आरोप मे लताडा जा रहा है !