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हिन्दू त्यौहार पर ही दोगुलापन क्यों ?

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क्या आपने सर्फ एक्सेल ( Surf Excel India ) का ऑफिसियल फेसबुक पेज देखा है । नही देखा है तो देखिये।

दिनांक 27 फरवरी 2019 को 20 बज के 23 मिनिट पे इस फेसबुक पेज से एक वीडियो अपलोड हुआ है ….

सर्फ एक्सेल के इस नए विज्ञापन का थीम सांग है …. घर से निकलो यारों खेलो …. खेलो सारे रंग …. इंद्रधनुष के जैसे रह लो सारे संग ….

लास्ट पंक्ति पे गौर कीजियेगा …. इंद्रधनुष के जैसे रह लो सारे संग ….

वीडियो का मजमून कुछ यूं है ….

मोहल्ले में रहने वाले छोटे से मुस्लिम बच्चे को नमाज़ पढ़ने मस्ज़िद जाना है लेकिन आज होली है और मोहल्ले के दूसरे हिन्दू बच्चे छतों पे रंग गुलाल गुब्बारे और पिचकारी लिए खड़े हैं …. अब छोटा मुस्लिम बच्चा नमाज़ पढ़ने कैसे जाए ?? …. उसके कुर्ते पे लाल हरा नीला गुलाबी पीला रंग किसी ने डाल दिया तो ?? ….

मोहल्ले की एक अन्य हिन्दू लड़की उस मुस्लिम लड़के की दोस्त रहती है …. हिन्दू लड़की की मम्मी सर्फ एक्सेल यूज़ करती है इसलिए हिन्दू लड़की सायकिल ले के गली में बेखौफ निकलती है …. मोहल्ले के सारे छोटे छोटे बच्चे छतों से सायकिल पे सवार छोटी सी हिन्दू लड़की पे रंग गुलाल गुब्बारों की बौछार कर देते हैं और उनका सारा रंग गुलाल गुब्बारे खर्च/खत्म हो जाते हैं ….

हिन्दू लड़की विजयी मुस्कान के साथ मुस्लिम दोस्त के घर के बाहर जा के सायकिल की घण्टी बजाती है …. 2 मिनिट बाद हिन्दू लड़की का मुस्लिम मित्र बच्चा चकाचक सफेद कुर्ता पायजामा पहने घर से निकलता है और साइकिल के पीछे बैठ जाता है …. हिन्दू बच्ची मुस्लिम बच्चे को मस्ज़िद के बाहर छोड़ देती है ….

मुस्लिम बच्चा हिन्दू लड़की से कहता है …. अच्छा नमाज़ पढ़ने जा रहा हूँ ….

मूल प्रश्न ये ही है कि ….

जब त्योहार हिंदुओं का है तो उसमें मुस्लिम बच्चे का चरित्र धार्मिक और दूसरे हिन्दू बछोङ का चरित्र आक्रामक क्यों ?? ….

मुस्लिम बच्चे को होली के प्यारे प्यारे रंग व गुलाल पिचकारी गुब्बारों से खौफ क्यों है ?? ….

अगर गंगा जमुनी तहजीब मजबूत ही करनी है तो सर्फ एक्सेल ने मुस्लिम बच्चे को हिन्दू बच्चों के साथ रंग खेलते हुए क्यों नहीं दिखाया ?? ….

ऐसे विज्ञापन हिन्दू त्योहारों पे ही क्यों बनते हैं ?? ….

बकर-ईद पे ऐसे विज्ञापन क्यों नहीं बनते ?? ….

होली के प्यारे खूबसूरत रंगों से डरने वाले बच्चे को क्या बकर-ईद पे लाल रंग के छींटों से डर नहीं लगता ?? ….

साथ ही सूक्ष्म तरीके से सोचियेगा तो पता चलेगा कि हिन्दू बच्चियों की दोस्ती मुस्लिम लड़को से होती है , ऐसी सोच बढ़ावा देने का प्रयास क्यों? …..क्या हिन्दू लड़के मुस्लिम लड़को के दोस्त नही होते?…

खेर जब सर्फ एक्सेल को सद्भावना फैलानी ही है तो क्यों ना मुस्लिम बच्चे को विज्ञापन में रंगने ना दिया गया …. ऑफ्टर ऑल हमारे अधिकांशत हिन्दू भी तो ईद मुबारक कहते ही हैं …. बकर-ईद पे नट बोल्ट भकोसते तो है ही ….

कुल मिलाकर हिन्दू त्योहारों का मखौल उड़ाते हुए नसीहत सिर्फ हिंदुओं को ही दी जानी है !!!! हिन्दू धर्म पर किस तरह और कैसे कैसे ‘वार’ किए जा रहे है?इसको सभी को जानना होगा । समझना होगा।

सादर/साभार

सुधांशु

(साभार-रितेश जी)

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