Home विविधा जिन्दगी: “मुस्कराहट”-कभी दिल में सुकून, तो कभी चुनौती देती

जिन्दगी: “मुस्कराहट”-कभी दिल में सुकून, तो कभी चुनौती देती

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Neera Bhasinजीवन के वो क्षण सबसे  अधिक सुन्दर और सुखद होते हैं जब सब लोग हँसते और मुस्कुराते हैं। यह ईश्वर का दिया हुआ मानव जाति के लिए एक अमूल्य  उपहार है।

कहने का तातपर्य यह है  कि  किसी और जीवधारी में हंसने मुस्कुराने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। अन्य जीव यदि  प्रसन्न होते हैं तो वे जोर जोर से आवाज़ करते है ,पक्षी जब अपने घरों को लोटते है तो बहुत शोर करती हैं। कवि या लेखक इस शोर को अलग अलग रूप में देखते हैं वे यदि उदास  है तो ये सब शोर है और यदि विरह या  रोमांटिक अंदाज में है तो कुछ और ही बयां करते है ऐसे में  पक्षिंयों का कलरव कभी ख़ुशी से चहचहाता  लगता है तो कभी मोर की कूक पिया की पुकार लगती है ,कोयल की बोली को तो कविंयो ने संगीत में पंचम स्वर का स्थान भी दे दिया है पर इसमें हसने हँसाने का कोई स्थान  नहीं है। उस  युग में जब  भाषा नहीं थी तब भी हंसी थी ,मुस्कराहट थी जो आँखों से चल कर होंठो तक फैल जाती थी ,और आज भी है। पर अन्य जीवधारी अपने अपने फ्रेम के अंदर बंधक है। शेर यदि खूंखार है तो वो हमेशा खूंखार है ,मुझे नहीं लगता की कभी किसी ने उसे हँसते मुस्कुराते देखा हो।
ऐसे ही अन्य पशु पक्षी तरह तरह की आवाजें निकाल अपने समाज में अपना जीवन बिताते हैं ,तरह तरह के करतब कर अपने साथी को रिझाते है लेकिन मुस्कुरा कर कभी कोई झूठा वादा नहीं करते फिर वे चाहे पालतू हो या वनवासी , क्न्योकि वे प्रभु की इस अमूल्य भेंट से वंचित है। इसलिए मानव जाति को अपने पर बहुत गर्व है, क्न्योकि उसे विकसित बुद्धि के साथ साथ ईश्वर ने हंसी भी दी है जिसका उपयोग वो कई तरीकों से करता है। एक हलकी सी मुस्कराहट दिलों में छुपे हजारों गम भी छुपा देती है। इंसान अपनी स्वकृति भी मुस्कुरा कर दे सकता है और अस्वीकृति भी ,इतना ही नहीं वो दुश्मन को चुनौती भी दे सकता है तो दोस्त को संतावना भी। माँ का दुलार भी छिपा है इसकी ओट में और पिता के संस्कार भी किसी कवी नेकहा   है “जहाँ काम आवे सुई कहा करे तलवार “अरे कभी कभी तो दोनों के का काम हंसी कर देती हैं ,टूटे दिल और रिश्ते सब जोड़ देती है तो कभी फांसी का फंदा बन जाती है क्न्योकि घातक परिस्तिथियाँ पैदा करना तो मामूली बात है।
शहर की उन तंग गालिंयो में जहाँ दिन के समय सन्नाटा पसरा रहता है ,वही जगह रात होते ही तरह तरह की जग मग रोशनीं से गुलजार हो उठती  है। हर खिड़की हर  छज्जे पर सज धज कर खड़ी लड़किंया अपने आप का प्रदर्शन करती तीखी मुस्कुराहट से पुरषों को अपनी ओर आकर्षित करती दिखाई पड़ती हैं और नशे में डूबा कामुक  ,पुरुष उस ओर खिंचा चला जाता है। मुस्कुराहट ने अपना काम कर दिया ,सुबह होने पर  ये मनचले अपनी सारी मेहनत की कमाई   लुटा कर घर लोटते हैं —जहाँ अब कई दिनों तक हंसी न सुनाई देगी न दिखाई देगी। पता नहीं अब बच्चों को  भर पेट खाना कब नसीब होगा  —–यह मुस्कुराहट ही तो थी जिसने बेकाबू कर दिया। हंसी का एक और बहुत प्रसिद्ध उदाहरण है आप सभी जानते है पर फिर भी ,दुर्योधन  पांडवों के नए राजमहल को घूम घूम कर देख रहे थे ,महल की अद्भुत शिल्पकला देख कर इर्षा और क्रोध से दिमाग धधक रहा था। महल में कई ऐसे स्थान  जिसे देखने पर कोई भी भ्रमित हो जाये ,ऐसे ही एक जलाशय को  गलियारा  समझ दुर्योधन उसमे जा  गिरा। ऊपर झरोखे से द्रोपदी यह दृश्य देख जोर से हॅंस पड़ी और  तना  मारते हुए बोली “अंधे का पुत्र अँधा ” ——–परिणाम क्या हुआ  –महाभारत का युद्ध। क्या जरुरत थी द्रोपदी को उपहास करने की —जिसकी कीमत चुकाने में भारत के आधी से ज्यादा सभ्यता का विनाश हो गया। अपने ही परिवार के हाथों अपना ही परिवार मारा गया।
हंसी या मुस्कुराहट यह मानवजाति के लिए ईश्वर का दिया एक अनूठा उपहार है जिसका उपयोग सही समय व स्थान पर ही करना चाहिए ,वर्ना कष्ट भी उठाना पड़ सकता है। आजकल  चारों ओर करबद्ध मिस्क़ुराहटें बिखरी पड़ी हैं ,ये किसी भ्रमजाल से कम  नहीं ध्यान रहे आप के बढ़ते कदम किसी जाल में न जा उलझें ,पहले ही संभल
 जाएँ, समझ जाएँ कहीं ऐसा न हो बाद में फड़फड़ाते रह जाएँ —और  कहना पड़े की हम तो हंसी हंसी में बर्बाद हो गए।
– नीरा भसीन- ( 9866716006 )

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