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साधना : सिर्फ 15 मिनट, और मौत का डर खत्म

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इस संसार में शायद ही कोई प्राणी ऐसा होगा, जिसे मौत से डर न लगता होगा. यदि किसी व्यक्ति को बता दिया जाए, कि फला-फला तारीख को तुम्हारी मौत होगी, तो शायद उस व्यक्ति के चेहरे से हंसी गायब हो जाए, जीवन का उत्साह खत्म हो जाए. लेकिन हमारे ऋषि-मुनियों, साधू-संतों ने मनुष्य को मौत के डर से मुक्ति का उपाय बताया है, जिसे अपना कर हम मौत के डर से छुटकारा पा सकते हैं, और प्रसन्नता पूर्वक जीवन जी सकते हैं.

– गहरी श्वास लो और छोड़ो
अगर तुम एक और प्रयोग करो तो विश्रांति और मौन का भाव और भी प्रगाढ़ हो सकता है. दिन में सिर्फ पंद्रह मिनट के लिए गहरी श्वास बाहर छोड़ो. कुर्सी पर या जमीन पर बैठ जाओ और गहरी श्वास छोड़ो और छोड़ते समय आंखें बंद रखो. जब श्वास बाहर जाये तब तुम भीतर चले जाओ. और फिर शरीर को श्वास भीतर लेने दो. जब श्वास बाहर भीतर जाये, आंखें खोल लो और तुम बाहर चले जाओ. ठीक उल्टा करो. जब श्वास भीतर जाये तो तुम बाहर आ जाओ. जब तुम श्वास छोड़ते हो तो भीतर खाली स्थान, अवकाश निर्मित होता है, क्योंकि श्वास जीवन है. जब तुम गहरी श्वास छोड़ते हो, तो तुम खाली हो जाते हो, जीवन बाहर निकल गया. एक ढंग से तुम मर गये, क्षण भर के लिए मर गये. मृत्यु के उस मौन में अपने भीतर प्रवेश करो. श्वास बाहर जा रही है. आंखें बंद करो और भीतर सरक जाओ. वहां अवकाश है.

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– आसान है प्रक्रिया, तुम कर सकते हो
तुम आसानी से सरक सकते हो. स्मरण रहे, जब तुम श्वास ले रहे हो तब भीतर जाना बहुत कठिन है. वहां जाने के लिए जगह कहां है? श्वास छोड़ते हुए ही तुम भीतर जा सकते हो. इन दोनों के बीच एक लयबद्धता निर्मित कर लो.

– गहन विश्राम की अवस्था
पंद्रह मिनट के इस प्रयोग से तुम गहन विश्राम में उतर जाओगे और तब तुम इस विधि के प्रयोग के लिए अपने को तैयार पाओगे. इस विधि में उतरने के लिए पहले पंद्रह मिनट के लिए यह प्रयोग जरूर करो, ताकि तुम तैयार हो सको. तैयार ही नहीं उसके प्रति स्वागतपूर्ण हो सको, खुले हो सको. मृत्यु का भय खो जायेगा, क्योंकि अब मृत्यु प्रगाढ़ विश्राम मालूम पड़ेगी. अब मृत्यु जीवन के विरुद्ध नहीं, वरन जीवन का स्रोत, जीवन की ऊर्जा मालूम पड़ेगी.

– मृत्यु झील और जीवन लहरों की भांती है
जीवन तो झील की सतह पर लहरों की भांति है और मृत्यु स्वयं झील है. और जब लहरें नहीं हैं तब ही झील है. और झील तो लहरों के बिना हो सकती है, लेकिन लहरें झील के बिना नहीं हो सकती. जीवन मृत्यु के बिना नहीं हो सकता है, लेकिन मृत्यु जीवन के बिना हो सकती है. क्योंकि मृत्यु स्रोत है. और तब तुम इस विधि का प्रयोग कर सकते हो.

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