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लकड़ी की काठी.. काठी पे मोड़ा.. बुरा न मानो होली है…

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लकड़ी की काठी.. काठी पे मोड़ा..  बुरा न मानो होली  है…

#  बुरा न मानो होली  है… यह सिर्फ होली का व्यंग्य प्रस्तुत करने का प्रयास है. इसे सिर्फ होली की भीगी भीगी खुशियों , रस भरी गुजिया के साथ उपयोग करें .  किसी भी किरदार की उपेक्षा करना, उपहास उड़ाना यां मखौल उड़ाने कि कतई मंशा नहीं है. किसी भी जाति , समाज , धर्म को मात्र वस्तुस्थिति के आधार पर सम्मान के साथ उलेखित किया है. इन सबको नीचा दिखाने यां जानबूझकर घसीटने का कोई प्रयास नहीं है .    समर्पित व्यक्ति, भक्त यां अंध भक्त बिलकुल न पढ़ें. पढने के बाद शारीरिक उत्तेजना – अवचेतना के बदलाव होली के अवकाश पर छुट्टी पर गए डाक्टर के लिए भी रंग में भंग डाल सकते हैं. बुंदेलखंड की स्वस्थ हास्य-व्यंग्य की परम्परा का आनंद लें.. और हाँ ! नर -मादा, तेल लगाना, सिरप, कुशी, चातिसघर को क्रमशः नर्मदा, तेलंगाना, सिर्फ, ख़ुशी एवं छत्तीसगढ़ ही पढ़ें.. बुरा न मानो होली  है..

लेयो इते अबहे जाडा खतम नई भया.. और होरी आ गई .. कोन्हू फिलम में नाना पाटेकर कहत हते ” आ गए मेरी मौत का तमासा देखने ” ऐसइ कछु ‘ चमन चूतिये’ आ गए  लड़का बच्चान के सिखान के लाने .. पानी न खराब करियो.. सूखे रंगन से होरी खेलियो.. लोगन के पियें के पानी नई मिल रओ ! तुम लड़का बच्चा होरी पे जित्तो पानी बर्बाद करो, उत्ते में तो पुरो गाँव अपनी प्यास बुझा ले है !! बताओ इन लोगन से कोनहु उपदेश मांगत है का ? चले आये खीसे निपोरते हुए.. ज्ञान बाटन के लान्हे !

सुन लेयो भैया भुनसारे से वात्सप पे बहुतै ज्ञान मिल जात है. अब पानी के लेके उपदेस न बांटो ! अबहीं तो वे हैं न.. का कहत हैं उके.. प्रियंका वाड्रा ! बे खुद गईं हती पानी पीबे के लान्हे गंगा मैया के तीरे ( अब समझे ! गंगा मैया साफ़ हो गई )… प्रियंका ने पानी पियो हतो की नई…. चुल्लू ( ओई जिमें लोग डूब मरत हेंगे ) में भर के… कोन्हू बनारसी बाबू ने पुरानो केसेट बजा दयो.. राम तेरी गंगा मैली हो गई.. पापियन के पाप धोत-धोत… ल्यो गाना सुनके रिसा गईं बिन्नू
(प्रियंका)… हमें लगत हैं उनौखो कोन्हू ज्ञान पिबा दयो है.. होरी में पानी खराब न करियो ! ल्यो बिन्नू प्रियंका ने कह दई, अब तो हम इतई होरी खेलें है… देख ल्यो भैया तुम सर्फ़ एक्सेल में दाग लगन से फुदक रये हो.. जे हैं रंग लगवान के लाने जिद्द मचाये हैं.

 

तुम ससुर के नाती समजत नई हो.. बस कोन्हू ने कह दई , पानी बर्बाद न करो सो बोकन लगे. हओ !! टी वि पे देखो न हत्तो तुमने.. का कहत ते .. दिखावन पे ना जाइयो , अपनी अकल लगाइओ ! अब लगाहो अकल ? के ऐसन लल्लू बने रहेओ ?
जे बताओ तुमाओ नाम का है ?
मुन्ना बरेदी !
तुमाय डुकर को नाम ?
राम सनेही बरेदी !
मुन्ना बहिया तुमाई लुगाई को नाम और बता देयो ?
श्यामला बरेदी !
देखो मुन्ना बहिया हम टी वि पे आन वाले रबिस कुमार नई हैं जो तुमसे पुचन लगें ” कोन जात के हो? लेकिन इत्तो बता देयो तुमाई लुगाई को इस्कूल में का नाम हत्तो ?
बे श्यामला कोष्ठी लिखत हतीं !!
अच्चा ! सो बे अब काये नई लिखत श्यामला कोष्ठी ??
हट ! बोडम हो का , इत्ताऊ नई मालुम तुमे, ( सरमात भये ) बे, हमसे बयाह गईं है ! इ लाने अब बे श्यामला बरेदी हो गईं !!
बहिया मुन्ना ! एई तो हमें ज्ञान नई मिलो अब तक ? अपनी बिन्नू प्रियंका अबे तक गांधी बनी हैं.  बे कबहूँ वाडरा बने कि न बने !!
बताओ ! तुम होरी पे पानी को , सुकी होरी को ज्ञान पिबा रये.. इते चुनाव शुरू हो गओ.. इंदरा गाँधी कि नाक से लेके अपने मुलायम चाचा की नाक तक सबै की नाक सामने आ गई.
हओ ! होरी है सो एक बात पुच लें ?
बको !
जे बताओ इन बच्चन के अपने मम्मा – चच्चा के ब्याओ में जायें के लाने मिल्हे कि नाय ? अब तो परेशान हो के मलाईका भौजाई छांड के चली गईं .
पहेलियाँ न बुझे करो .. सीधे सीधे बताओ कोन मम्मा – कोन चच्चा ?
लेयो इने जेई नई पता , आ गए भुनसारे – भुनसारे ज्ञान बाटन !! अरे दद्दा !  उते देखो अपने सल्लू बहिया को अब तक बयाह  न भओ, सब काम मलाईका भौजाई के करने पर रओ तो… सो खिसिया गईं एक दिन.. कहन लग गईं अरबाज बहिया  से.. सुन लेयो घर में अब तक पचास साल को डंगरा बच्चा हेंगा है.. इ लाने घर में और कोनहु नओ बच्चा नई आ पा रओ.. तुमाय बस को नई है कछु , इ लाने हम तो जा रये हेंगे.. लेयो चच्चा के ब्याय में जायें से पहले ही भौजाई बच्चन के ल्याने के लाने खिसक लईं..
और इने देखो जे खुदई के पप्पू कहत रहत हेंगे ! इनकी अम्मा ने इनके ब्याओ के लाने द्रोपदी जैसी शर्त रख दई है.. कहत रहीं कि जोन मोडी यां उनके डुकर , मोडी के भईजा पप्पू की अम्मा के हिंदी लिख्वो – पड्बो  सिका देबे.. ओई के घरे जे अपने मोड़ा का संबंद करेगें…. टेर लेयो जीके टेरने है.. काये संबंद  हो जात तुमाय कहें से..  अपने ‘जी जी आई सी’ कि बड़ी बहिन जी गईं थी, हिंदी सिखान के लाने पप्पू की अम्मा को ! बड़ी बहिन जी खुदई हिंदी भूल गईं हैंगी… चरखारी वाली चाची की अटारी में बैठ के पंचायत लगा रही थी ! कह रईं थी कि हमने  पप्पू की अम्मा से कही… हमाये पाच्छे – पाच्छे कहत रहो.. “मेरे पति का वतन मेरा  है..” “मेरे पति का वतन मेरा  है..” अब पप्पू की अम्मा जे वाक्य हिंदी में सीख के कहन लग गईं…मेरे पेटी का बटन मेरा है…मेरे पेटी का बटन मेरा है…
हमने उन्खों नदियन के नाम सिखाए.. हमने कही बोलो ‘ नर्मदा ‘
 बे कहन लग गईं ” नर – मादा “
रैन दयो भईजा.. हमसे न हो पायेगा..
अब पप्पू मामा की शादी के लाने हम अपना बलिदान थोडई दै देन्गे !!
सुनो ! तुम तो होरी कि बुन्देलखंडी फाग गात रहो.. लकड़ी की काठी.. काठी पे मोड़ा.. मोड़े की पीठ पे बैठो बड़ो वाला घोड़ा… होरी के रंगन से बचे के लाने टोपी लगा के दौड़ा.. लकड़ी कि काठी…
अब भईजा ! बोत हो ग ओ तुमाओ ज्ञान ? दिवारी पे कहत रहे पटाखा न फोडियो, अब पानी बर्बाद न करियो.. हमई मिले उपदेश पेले के लाने.. निकल ल्येओ अब.. तुमे नई पता बुंदेलखंड की होरी बिना पानी – रंग – फुहार – गुलाल के होई नहीं सकत… हमाओ  राठ है न ? उत्ते तो कीचड कि होरी होत है.. ओई कीचड़ जो अब चुनाव में फेंकोगे तुम सब एक दुसरन  पे…. लेकिन एक बात कह दें.. हम बुन्देली कीचड़ फेकन के बाद होरी ख़तम होन  से पहले ही अपने मन को सबरो मैल धो कर एक दूसरन के गले लगात हैं.. रामदई !! सच्ची कहत है .. पूछ लेयो पड़ोसन से.. आजई  सबेरे गले लगाओ तो… हो हो होरी है…   बुरा न मानो होरी है… हो हो होरी…
विशाल चड्ढा ( 7588518744 )

2 COMMENTS

  1. बहुत सटीक शब्दों में लिखा गयी श्रेष्ठ रचना भाषा एवं कलम की घार और उस पर होली का तयौहार आनन्द ही आ गया

    • होली शुभकामनाएं ! सराहना व लेखन के प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद !!

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