Home खानदेश समाचार जामनेर मे फर्जी डाक्टर का झोला झपटमार मामला रफ़ादफ़ा ?

जामनेर मे फर्जी डाक्टर का झोला झपटमार मामला रफ़ादफ़ा ?

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jamner doctor

जलगांव (नरेंद्र इंगले ):प्रत्येक महिने के 12 तारीख को जामनेर के निजी मंगल भवन मे अपने पंजीकृत स्थानीय मरीजो कि सेवा मे प्रकट होनेवाले एक झोलाछाप डाक्टर का झोला झपटने का मजेदार मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा इस मामले को इस कदर रफ़ादफ़ा किया गया कि मानो यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा हो ! इस झपटमारी के बारे मे खुद यहा के medical officer अब तक अंजान है ! कथित डाक्टर कुलदीप सिंग हमेशा कि तरह महिने कि 12 तारीख को अपने मरीजो कि नाडी जांचने जामनेर पहुचा दुकान लगायी तभी जलगांव के किसी पत्रकार तत्व ने अपने स्थानीय हस्तक के जरीये डाक्टर को उसके फर्जीवाडे के बारे मे अवगत कराया और कानूनी कार्रवायी कि धमकि भी दि जिससे डाक्टर भन्नाया और अपने बाह्य मरीज कक्ष से भागने लगा हडबडी मे डाक्टर को कुछ शारीरीक चोट भी पहुची जिसका इलाज कराने उसे निजी अस्पताल मे लाया गया वहा कुछ सार्वजनिक संदेशवहन का दायित्व निभाने वाले लोगो ने मौके को भांप कर डाक्टर कि झोली झपट ली और उसे वहा से सकुशल रवाना कर दिया ! बताया तो यह भी जा रहा है की लेनदेन का व्यवहार कुछ कैश और कुछ बैंक चेक द्वारा किया गया ! डाक्टर के खिलाफ़ ना कोई शिकायत ना पुलिस रेकार्ड़ मे कोई फ़ायलींग सब कुछ बिलकूल शांतिपूर्ण तरीके से केवल इस लिए निपट लिया गया क्यो कि झोला झपटना हि इस स्टोरी का सारांश था !

इस पुरे घटनाक्रम मे डाक्टर कि पहचान गैर महाराष्ट्रीयन पंजाबी बतायी गयी झपटमारी को अंजाम देने के लिए खास सफ़ेदपोशो के सहारे प्रशासनीक तंत्र के दुरुपयोग कि बाते भी स्पष्ट रुप मे रेखांकित होती है !  कथित डाक्टर पर नकेल कसने के बजाय संदेशवाहको के कुछ रुपयो कि लालच को पुरा करने के लिए एक ऐसे तत्व को भागने कि रीयायत दे दि गयी जो अब देश के अन्य शहरो मे अपने हुनर कि मंडी सजाकर स्वास्थ के नाम पर गरीबो कि जेबे कांटेगा और आम लोगो कि जिन्दगी से खिलवाड करता रहेगा ! यह मामला इस लिए भी बेहद खास है क्यो कि जामनेर मेडीकल सायन्स मंत्री गिरीश महाजन का होम टाऊन है और पुलिस पर सिधी ऊँगलिया उठायी जा रहि है मामले मे कोतवाली प्रमुख प्रताप इंगले ने भगोडे डाक्टर के बयान वाला विडीयो सुनाया जिसमे डाक्टर किसी के बारे मे कोई शिकायत नहि होने का बयान दे रहा है !

अब सवाल यह भी उठता है कि पुलिस ने बगैर Medical officer को सुचित किए फर्जी डाक्टर का बयान किसकि सुरक्षा के हक मे लिया ? और बिना किसी शिकायत कुछ भी न करने वाली पुलिस इस मामले से कैसे जुड गयी ? कमाल का सन्नाटा पसारा हुआ है मानो कुछ हुआ हि नहि है ! इस झपटमारी कांड जैसे अन्य मामलो मे जब कभी सार्वजनिक हितो के रक्षा कि बात आएगी और उसमे प्रशासन हि कथित रुप से लालच का शिकार रहा होगा वहा मंत्रीजी कि साख पर प्रश्नचिन्ह तो लगेगा हि क्यो कि मंत्रीजी खुद स्वास्थसेवक के तमगे से नवाजे जा चुके है ! इस पुरे मामले मे जांच कि मांग करना उस शिष्टाचार कि अवमानना होगी जो प्रासंगिकता कि ओर इशारा करता है और प्रासंगिकता अवसरवादीयो के उस लालच  कि शिकार हो चुकि है जिसकि किमत हमारा लोक समाज चुकाता आ रहा है !