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अब के बरस तुझे धरती की रानी कर देंगे, अब के बरस

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sudhanshu  taakमहबूबा मुफ़्ती तुम लोगों का डर देख वे तमाम लाखों लाख कश्मीरी पण्डित आज ख़ुशी से रो रहे होंगे जिनकी आंखों के सामने उनकी बहू बेटियों का बलात्कार किया गया था। जिनके मासूम बच्चों को क़ाफ़िर कहकर काट डाला गया था। जिनके बुज़ुर्गों के जीवन भर की यादें उनकी संपत्ति को रातों रात छोड़कर भागना या मरना पड़ा था….जिनका आज भी कोई ठोर नहीं।
तेरे जैसी जेहादी औरतों को तो औरत कहने में ही दुःख हो रहा जिसनें केवल अपने मज़हबी मंसूबों और अय्याशी के लिए कश्मीर जैसे स्वर्ग को नरक बनाकर रख दिया….
याद कर 1989-90 का वो दौर जब कश्मीरी हिन्दुओं के घरों की दीवारों पर मोटे मोटे अक्षरों में लिख दिया गया था कि अपनी अपनी बहू बेटियों को हमारे लिए छोड़ तत्काल घाटी ख़ाली कर चले जाओ…
वो दौर याद कर जब तुम्हारा बाप मुफ़्ती सईद दुर्भाग्य से, नीचता के चलते देश का गृह मंत्री बन गया था । और फिर तेरी बहन की फ़र्ज़ी किडनैपिंग हुई थी ताकि तेरा बाप पाकिस्तान के इशारे पर खूंखार आतंकवादियों को छुड़वा सके…….
याद कर वो हर जुमा जब मस्ज़िदों से निकलती ज़हरीली तक़रीरें पूरे देश को थर्रा देती थीं…
याद कर उन हज़ारों सैनिकों के उन पार्थिव शरीरों को जिन्हें तेरे आतंकी कुत्तों ने घात लगाकर मारा….
याद कर उन घायल जवानों को जिन पर हर जुमे की नमाज़ के बाद पत्थर बरसाए जाते हैं…
याद कर उन अमरनाथ यात्रियों की चिन्ता, भय और परेशानी को जिन्हें अपने ही देश में अपने ही आराध्य के दर्शनों को सेना के साये में जाना पड़ता है…
तुझे आज अपना और तमाम यासीनों, गिलानियों से लेकर फ़ारुखों और वाइजों का डर बेहद छोटा लगेगा….
देश आज कश्मीर को लेकर भारत सरकार के हर निर्णय के साथ खड़ा और अड़ा है, बिना शर्त…. कश्मीर ने कई वर्षों से भयंकर दुख झेले है…..कश्मीर के लिए , #फ़िल्म #क्रांति के देशभक्ति गीत के माध्यम से बस इतना ही कहना है –
सुख सपनो के साथ हज़ारों,दुख भी तू ने झेले,
हंसी खुशी से भीगे फागुन,अब तक कभी ना खेले,
चारों ओर हमारे बिखरे बारूदी अफ़साने,
जलती जाती शमा जलते जाते हैं परवाने,
फिर भी हम ज़िंदा हैं,अपने बलिदानों के बाल पर,
हर शहीद फरमान दे गया,सीमा पर जल जल कर,
यारों टूट भले ही जाना,लेकिन कभी ना झुकना,
कदम कदम पर मौत मिलेगी,लेकिन फिर भी तुम ना रुकना,
बहुत से लिया अब ना सहेंगे,सीने भड़क उठे है,
नस नस में बिजली जागी है,बाज़ू फ़ड़क उठे हैं,
सिंहासन की खैर करो,ज़ुल्मो के ठेकेदारों,
देश के बेटे जाग उठे,तुम अपनी मौत निहारो,
अंगारो का जश्न बनेगा,हर शोला जागेगा,
बलिदानों की इस धरती से,हर दुश्मन भागेगा,
हमने कसम निभानी है,देनी हर क़ुर्बानी है,
हमने कसम निभानी है,देनी हर क़ुर्बानी है,
अपने सरों की,अपने सरों की अंतिम निशानी भर देंगे,
अब के बरस………..
अब के बरस तुझे धरती की रानी कर देंगे,
अब के बरस तेरी प्यासों मे पानी भर देंगे,
अब के बरस तेरी चुनर को धानी कर देंगे,
अब के बरस…..
भारत माता की जय, वन्दे मातरम, जय जय श्रीराम..

सादर/साभार

सुधांशु