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अदुभुत, अकल्पनीय, अविश्वसनीय-यह संकल्प ही कोरोना को हराएगा

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अदुभुत, अकल्पनीय, अविश्वसनीय-यह संकल्प ही कोरोना को हराएगा

नई दिल्ली (तेज समाचार डेस्क): एक वैश्विक महामारी के खिलाफ ‘हम भारत के लोगों’ ने जैसा संकल्प और संयम दिखाया है, वह अद्भुत है, अतुलनीय है और अविश्वसनीय भी लगता है। 25 साल के पत्रकार जीवन में यह दृश्य पहले कभी नहीं दिखा था। देश के प्रधानमंत्री के आह्वान पर जनता का स्वतःस्फूर्त कर्फ्यू न केवल अभूतपूर्व रूप से सफल रहा बल्कि उसने यह भी स्थापित किया कि देश की जनता अब धीरे धीरे अनुशासित होती जा रही है। इसके बाद शाम को पांच बजे सेवाकर्मियों के सम्मान में जो नाद हुआ, उससे केवल कृतज्ञता ही प्रकट नहीं हुई है बल्कि विश्व समुदाय को एक संदेश भी मिला है। प्रधानमंत्री ने बीमार होने का डर छोड़कर पीड़ितों की सेवा में लगे चिकित्सकों और सुरक्षा बलों के साथ ही उनके सहयोगियों के लिए ताली-थाली, घंटी-घंटा बजाने का आह्वान किया था।
वे अविस्मरणीय क्षण थे जब देश के प्रथम नागरिक रामनाथ कोविंद अपने परिवार के साथ राष्ट्रपति भवन में ताली बजा रहे थे तो दूर केरल में 80 साल से ऊपर की माई भी बैसाखी के सहारे खड़ी ताली बजा रही थी। केन्द्रीय मंत्रियों, राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों, सांसदों ने ही नहीं बल्कि विपक्षी नेताओं ने भी थाली बजाने में गर्व का भाव जताया और उसे ट्वीट भी किया। देश भर के गली-कूचों, सोसाइटियों की बालकनियों में  परिवारों, और जो बुजुर्ग खड़े नहीं हो सके, उन्होंने बिस्तर पर लेटे लेटे ही ताली बजाकर सेवा में जुटे लोगों के प्रति जो कृतज्ञता ज्ञापित की, वह शब्दों में व्यक्त नहीं की जा सकती। वह जो अनुभव है वह हर सेवाभावी के मन को भावविभोर कर गया होगा।
वैश्विक महामारी का रूप धारण कर चुके कोरोना को हराने के लिए भारत ने जिस तरह से कमर कसी है, वह नेतृत्व की सूझबूझ और दूरदृष्टि का परिचायक है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री के आह्वान को मिले अपार समर्थन ने बताया है कि भारतीय समाज बहुत सजग हो चला है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि पश्चिमी जगत की तरह भारतीय समाज न तो एकांगी है और न ही उतना व्यवस्थित। भारतीय जीवनशैली ही मेले-ठेले -रेले वाली रही है। ऐसे समाज को आइसोलेशन या सोशल डिस्टेंसिंग या सामाजिक दुराव जैसे शब्द ही अजीब से लगते हैं। दूसरे, 130 करोड़ की विशालकाय आबादी वाले इस देश में सुविधाओं और संसाधनों की पश्चिमी जगत से तुलना भी नहीं की जा सकती। ऐसे में अब तक लाइलाज घोषित कोरोना की महामारी को संकल्प और संयम से ही हराया जा सकता है।
हर व्यक्ति के भीतर मौजूद संकल्प और संयम नामक रोग प्रतिरोधक क्षमताओं को जगाने का काम किया है भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी ने। यह उनके नेतृत्व पर देश की जनता के विश्वास की परिचायक है कि भारत के सभी राज्यों के बड़े शहरों की तो बात ही छोड़िए, दूर-दराज के गांव और कस्बों तक में लोग घरों से बाहर नहीं निकले। हमने वो दृश्य भी देखें हैं जब किसी भी प्रकार के दंगे के बाद प्रशासन द्वारा लगाए गए कर्फ्यू में केवल उसी स्थान पर हलचल नहीं होती थी, जहां सुरक्षा बल तैनात हों। गली मोहल्लों में क्रिकेट का खेल होता रहता था और नुक्कड़ों पर ताश खेलते लोग मिलते थे या फिर लोग बाहर घूमने-फिरने निकल जाते थे। पर आज ‘जनता कर्फ्यू’ में न पुलिस रोक रही थी न सुरक्षा बल तैनात थे। लोग स्वतः ही घरों में बंद थे।
प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की यह भी सफलता है कि धीरे-धीरे ही सही उन्होंने लोगों के भीतर कोरोना रोग की भीषण गंभीरता की समझ पैदा की। इतनी बड़ी आबादी में लोगों के बीच बिना घबराहट और भगदड़ पैदा किए इस संदेश को पहुंचाना अपने आपमें एक चुनौती थी। दुनिया भर से आ रही खबरें मन में खौफ पैदा कर रही थीं। वे डरा रही थीं कि चीन, इटली, ब्रिटेन, स्पेन और अमेरिका जैसे विकसित और संसाधनों से भरपूर देश भी इस महामारी के सामने लाचार नजर आ रहे हैं। इटली की लापरवाही की बातें हो रही हैं जिसके चलते वहां 5 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। मात्र 6 करोड़ की आबादी वाले और चिकित्कीय सुविधाओं से सम्पन्न इस देश में एक-एक दिन में 500 से ज्यादा मौतें हुईं। तब भारत के लिए यह चिंता और डर का बड़ा कारण भी जिसकी आबादी 130 करोड है और चिकित्सा सेवाओं की हालात कितनी भी सुधर जाए, हजारों हजार बीमारों का एकसाथ इलाज असंभव ही लगता है।
ऐसे में यह जरूरी था कि स्थिति गंभीर होते ही पूरी तैयारी की जाए। भारत ने वे सभी जरूरी कदम उठाए जिससे उन देशों से लोगों और सामान की आवाजाही रुके जहां कोरोना का प्रकोप फैल चुका है। विदेशियों की जांच के साथ ही भारत के लोगों को विदेश से लाने और उन्हें विसंक्रमित करने तक आइसोलेशन में रखने के बाद सरकार ने अन्तरराष्ट्रीय उड़ानें रोकीं, कार्यालयों में लोगों की संख्या घटाते हुए 25 प्रतिशत तक की और घर से कामकाज को प्रोत्साहन दिया। उसके बाद 14 घंटे का जनता कर्फ्यू, तब कहीं जाकर कुछ जिलों और राज्यों में लॉक डाउन की घोषणा की गई। यह सब योजना बनाकर और पूरी तैयारी से किया गया। साफ दिख रहा है कि भारतवासी कोरोना की चुनौती का संकल्प और संयम से सामना करने को मन से तैयार हैं।